WHY I AM A HINDU – READ IN HINDI

 Aakash Srivastava

यह हिंदुत्व ये सम्बंधित फेसबुक पर सबसे अधिक साँझा किये जाने वाला लेख है। हिंदुत्व को जानने के लिए यह सबसे सरल और सबसे अच्छा लेख है। यह लेख अंग्रेजी में उदयलाल  जी द्वारा लिखा गया है जिसे हम Voxnmedia.in पर हिंदी में साँझा कर रहे हैं जिससे कि इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ सकें। यह लेख हिंदुत्व के बारे में पूछे गए कुछ सामान्य प्रश्नों का उत्तर है।

आगे उदयलाल  जी के शब्दों में (हिंदी में):

एक अमरीकी लड़की दाहिनी तरफ खिड़की के बगल में बैठे थी। यात्रा लंबी होने वाली थी – लगभग 7 घंटे लंबी।
मैं उस लड़की को ईसाई धर्म की पुस्तक बाइबिल पढ़ते देख कर आश्चर्यचकित हो गया क्योकि आमतौर पर अमरीकी लड़कियां धार्मिक नहीं होती हैं। बाद में मुझे एहसास हुआ कि 11 सितम्बर की घटना के बाद अमरीकियों की विचारों  में बदलाव आया है। अचानक से वह थोड़े धार्मिक हो गए हैं।

कुछ देर बाद हमारी बात शुरू हुई, उसे मैंने बताया कि मैं भारत(India) से हूँ।

तब उस लड़की ने मुझसे पूछा ” आप किस विश्वास करते है ? ”

“क्या ? मैं प्रश्न समझा नहीं । ”

“आपका धर्म क्या है ? ईसाई या इस्लाम ?”

मैंने उत्तर  दिया:  “न ही ईसाई हूँ और न ही मुसलमान।”

उसने आश्चर्य से मेरी ओर देखा और पूछा: “तब आप क्या हो ?”

मैंने उत्तर  दिया कि  “मैं  हिन्दू हूँ ।”

वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे पिंजड़े में बंद किसी पशु को देख रही हो। वह समझ नहीं पाई कि मैं क्या कह रहा था। यूरोप में एक आम आदमी ईसाई धर्म या इस्लाम के बारे में ही जनता है, क्योंकि ये ही  विश्व के सबसे सर्वाधिक प्रचलित धर्म हैं

कुछ समय पश्चात उसने मुझसे पुनः पूछा “हिंदुत्व क्या है ? ”

मैंने उसे समझाया कि मैं हिन्दू माता और हिन्दू पिता से जन्मा हूँ इसलिए मैं जन्म से हिन्दू हूँ।

“आपके पैगम्बर कौन हैं ? ”

” हमारा कोई पैगम्बर नहीं है। ”

” अपका धार्मिक ग्रन्थ क्या है ? ”

” हमारी कोई एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, हमारी सैकड़ों, हज़ारो धार्मिक पुस्तके और ग्रन्थ हैं “, मैंने कहा।

“ओह! चलिए अच्छा आपका ईश्वर कौन है ?”

” इससे आपका मतलब क्या है ?”

” जैसे हमारे ईश्वर यीशु हैं, मुसलमानों के अल्लाह हैं ,क्या आपका कोई ईश्वर नहीं ?”

एक पल के लिए मैंने विचार किया कि मुस्लिम  और ईसाई दोनों एक भगवान् को मानते हैं  ( पुरुष ईश्वर ) जिसने ब्रम्हाण्ड को बनाया है । उसके दिमाग में वही सब है जो उसने अब तक जाना है। उसके (या वह हर व्हक्ति जो ईसाई या इस्लाम धर्म मानते हैं) अनुसार  किसी भी धर्म को, एक ईश्वर, एक धर्म पुस्तक और एक पैगम्बर की आवश्यकता होती है। इन धर्म के लोगों की सोच इतनी छोटी हो गयी है कि उसके धर्म पुस्तक के अलावा सब कुछ उन्हें गलत लगता है। मैं  उसकी धार्मिक सोच के बारे में समझ गया कि उसके  लिए धर्म क्या है। आप वर्त्तमान काल में किसी भी धर्म की तुलना हिंदुत्व से नहीं कर सकते हैं जहा आप एक ईश्वर में विश्वास करते हों। वह समझ नहीं पा रही थी कि एक धर्म इतना असंतुलित हो कर भी हज़ारों वर्षों से कैसे चला आ रहा है वो भी इतनी सारे विदेशी हमलों के बाद भी ?

उसे यह कुछ रुचिकर प्रतीत हुआ  उसने मुझसे पुनः पूछा  कि क्या मैं धार्मिक हूँ ?

मैं इस अमरीकी लड़की से क्या कह सकता था?

मैंने कहा: मैं प्रतिदिन मंदिर नहीं जाता हूँ, धार्मिक क्रिया कलाप नहीं करता। बचपन में मैंने कुछ धार्मिक क्रियाएँ सीखी थी आज भी कभी कभी उन्हें कर के आनंद ले लेता हूँ ।

” आनंद ? क्या आपको ईश्वर का भय नहीं है ?”

“नहीं, मैं ईश्वर से नहीं डरता , ईश्वर हमारा मित्र है, न के शत्रु । किसे ने मुझे इन रीती रिवाज़ों को प्रतिदिन करना आवश्यक नहीं बताया।”

उसने कुछ समय सोचा और बोली: ” क्या अपने कभी अपना धर्म परिवर्तित करने का विचार किया है ?”

” मैं अपना धर्म क्यों बदलूँ ? यदि मैं स्वयं अपने धर्म की कुछ क्रियाओं का विरोध करू तो भी मे धर्म परिवर्तन नहीं करूँगा । क्योकि हिन्दू होने के नाते मुझे बिना किसी शर्त स्वतंत्रता के साथ सोचने का अधिकार है। मैं हिन्दू बलपूर्वक  नहीं हूँ बल्कि यह मेरा निर्णय है।” मैंने उसे बताया कि हिंदुत्व कोई धर्म नहीं है, हिंदुत्व कुछ विचारों और रीतियों पर आधारित है। हिंदुत्व ईसाई या इस्लाम धर्म की तरह नहीं है जो किसी एक के विचारों पर आधारित हो या किसी संतुलित संस्था या संगठन पर आधारित हो।

” तो आपको ईश्वर में विश्वास नहीं है ” उसे उत्तर हाँ  या ना में चाहिए था।

” मैंने ऐसा नहीं कहा, मैं परम सत्य का खंडन नहीं करता। हमारी श्रुति, स्मृति – वेद, उपनिषद, गीता कहते है – ” भगवान् हो भी सकता है, या नहीं भी पर हम परम ब्रम्हा की आराधना करते हैं जो इस संसार का रचयिता है ।”

“आप एक  ईश्वर पर विश्वास क्यों नहीं करते ?”

” हमारी एक संकल्पना है जो एकेश्वर वादी ईश्वर से भिन्न है। ऐसा ईश्वर तर्क विहीन  है जो रहस्यमयी बादलों के पीछे छिपकर  कुछ व्यक्तियों ( जिन्हे सन्देश वाहक कहा जाता है )  को भेजता है , और उनके  माध्यम से तर्कशून्य कहानियाँ  सुनाता है , मुझे नहीं लगता की भगवान् एक स्वेच्छाधारी राजा की तरह है जो ज़बरदस्ती अपनी आराधना कराए । ईश्वर को इसकी कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए  के हम उसकी आराधना करे या उससे डरे  ।”

” इस तरह की बातें कम समझ के व्यक्तियों की कल्पना मात्र ही है , मैंने उसे बताया कि इस प्रकार का अभिप्राय केवल अनपढ़ लोगों की कल्पना है,  हिन्दू धर्मं में कुछ लोग एक ईश्वर को मानने वाले हैं। आरम्भ में हिंदुत्व भी अंधविश्वास से लिप्त प्रतीत होगा । परन्तु हिन्दू धर्म सिद्धांत सभी अन्धविश्वास से भरे विचारों  का खंडन करते  है।

“अच्छा  है कि आप मानते हैं की ईश्वर का अस्तित्व हो सकता है । आपने कहा कि आप प्रार्थना करते हैं। तो आपकी प्रार्थना क्या है ?”

” लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु । ॐ शांति शांति शांति। ”

वो हँसी, और उसने पूछा कि इसका क्या अर्थ है?

“संसार के सभी जीव सुखी रहें, ॐ शांति शांति शांति। ”

” हमम! अति आनंददायक। मैं इस धर्म के बारे में और जानना चाहती हूँ। यह प्रजातंत्रात्मक है, विस्तृत मानसिकता वाला और स्वतंत्र  है। ”

” सत्यता तो यह है कि, हिंदुत्व व्यक्तिगत धर्म है, व्यक्ति के लिए और व्यक्ति के द्वारा जिसकी जड़ें वेद और भगवत गीता में हैं। यह व्यक्ति द्वारा ईश्वर तक अपनी इच्छा अनुसार बढ़ने पर आधारित है- यह बहुत ही सरल है ।”

” एक  व्यक्ति हिन्दू धर्म कैसे अपना सकता है ?”

” कोई भी आपका धर्मान्तरण हिंदुत्व में नहीं कर सकता है, क्योंकि यह  एक धर्म नहीं है, पर हिंदुत्व कुछ विचारों और रीतियों पर आधारित है। हिन्दू धर्म में सब स्वीकृत है , यह सभी तार्किक विचारों का स्वागत करता है , क्योंकि इसमें ऐसी कोई संस्था या अधिकार नहीं है जो यह बताए कि हमें क्या मना है या क्या नहीं ।

मैंने उसे बताया- अगर आप जीवन में किसी अर्थ को ढूंढना चाहते हो तो उस्की खोज किसी धर्म में मत करो, किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में  मत जाओ या एक गुरु से दूसरे गुरु के पास मत भटको ।

वह एक वास्तविक जिज्ञासु  लग रही थी ,  मैंने उसे समझाया कि  बाइबिल स्वयं मार्गदर्शन देता है कि ईश्वर का साम्राज्य  स्वयं आपके अंदर है , मैंने उसे यीशु के  उपदेश की याद दिलाई जिसमें वो कहते है कि प्रेम सभी की आवश्यकता है । वही से आप जीवन के अर्थ को खोज सकती हो। ईश्वर की हर एक रचना को प्रेम करना ही वास्तविक धर्म है । ईश्वर से भिन्न कुछ भी नहीं है, क्योंकि ईश्वर सर्वव्यापी है। हर जीवित एवम् अजीवित प्राणी का वस्तु का आदर करिये। यही हिंदुत्व सिखाता है।

हिंदुत्व को सनातन धर्म भी कहते हैं । यह धर्म की क्रियाओं और जीवन के नियम संग्रह पर आधारित है।  हिंदुत्व विचारों के एकाधिपत्यता से परे है। इसमें सबका स्वागत है। हिन्दू एक ईश्वर में विश्वास करते हैं( स्वयम्भू  ईश्वर में नहीं) जिनके अनेक रूप हैं।  ईश्वर समय से परे और निराकार है।

आज के हिंदुओं के पूर्वज सनातन सत्य एवं लौकिल नियमों में विश्वास करते थे और यह सत्य हर जिज्ञासु के लिए उपस्थित हैं। पर हिंदुओं में भी एक वर्ग  ऐसा है जो अंधविश्वास में विश्वास रखता है और पक्षपाती है जो इसे अन्य धर्मों की तरह इसे संतुलित संगठनात्मक बनना चाहता है।

मैंने कहा: धर्म मल्टी-लेवल-मार्केटिंग बन गए हैं और इस उद्योग को धर्म परिवर्तन के द्वारा विस्तारित करने का प्रयास हो रहा है। आज के समय में आध्यात्मिकता ही सबसे बड़ा व्यवसाय है।

मैं हिन्दू हूँ क्योंकि यह अहिंसा और न्याय की शिक्षा देता है – “अहिंसा परम धर्मं , धर्म हिंसा तथीव च ” – अहिंसा हमारा सबसे बडा कर्तव्य है। और धर्म के लिए धर्म सम्मत हिंसा न्याय है , मैं हिन्दू हूँ क्योंकि यह ऐसा नहीं है जो मेरे मस्तिष्क या विचार को प्रतिबंधित करे।