इनसे मिलिए ये हैं पप्पू

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पप्पू कहते ही आप ग़लत क्यूं सोचने लगते हैं, पप्पू दरअसल परमपूजनीय का शॉर्टफार्म है, बीच में आधा प वार्तालाप की सहूलियत के लिए जोड़ा गया था। पपू कहने में होंठ चिपकते हैं न इसलिए? इस नाम में कोई बुराई नही, बुराई तो राहू में है। राहू लो आया दशा बिगड़ी समझो! पेट खराब, धन
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माया महाठगनी हम जानी

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वो जो खुद जात बिरादरी के नाम पर जोड़ तोड़ समीकरण और गठजोड़ की राजनीति पे निर्भर थे उन्हें मोदी भय ने एक साथ रहना सिखा दिया। कुत्ते वास्तव में झुण्ड में रहते हैं, शेर अकेला चलता है वाली कहावत एक हद तक सही साबित होने को है और जानवरों पर बनी इस कहावत को
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घमण्ड भरा मस्तक नही सहज व्यक्तित्व चाहिए

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बबुआ की नीयत में बातचीत में और हाव भाव में कोई परिवर्तन नही आया है, वो कहते हैं न कि रस्सी जल गई पर बल नही गए। यहां तो रस्सी ही कोई ले गया पर हवा में लटके अखिलेश को कोई दिक्कत नही दिख रही, उनका ऐसा अड़ियल रवैया उनकी कुन्द बुद्धि का सबूत दे
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नोटबन्दी से काबू आया नक्सलवाद एक झूठ-4

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सालों से नक्सलियों का पीछा कर रही, उनके पुर्नवास कार्यक्रम पर कार्य कर रही पुलिस को वास्तव में नक्सलियों के विषय में पूरी जानकारियां उपलब्ध हैं ही नही! सवाल उठता है कि क्या आत्मसमर्पण करने वाले आदिवासी सचमुच नक्सली ही होते हैं? यह सवाल पुलिस के आला अधिकारियों को नागवार गुजरता है। पुलिस का खुफिया
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नोटबन्दी से काबू आया नक्सलवाद एक झूठ-3

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आत्मसमर्पण कराने का प्रयास आज से नही वरन् पिछले कई सालों से किया जा रहा है, सच्चाई आज भी कहीं गर्त में छुपी हुई है। 5 से 10 प्रतिशत आत्मसमर्पण भले ही सही रहे हों किन्तु नक्सलवादी-माओवादी का नाम देकर पुलिस असल में साधारण ग्रामीणों पर दबाव बनाकर जबरन 30 से 50 प्रतिशत आत्मसर्मपण का
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नोटबंदी से काबू आया नक्सलवाद एक झूठ – 2

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कम्यूनिस्ट विचारधारा का दो भागों में बंटकर सशस्त्र क्रान्ति का स्वार्थ के खेल में बदलता रूप आज सिर्फ देश के मध्य एवं पूर्वी क्षेत्रों के युवा रक्त का खेल बनकर रह गया है। लाल झण्डा जो पहले समानता के अधिकार का परिचायक था, उसका स्थान अब केवल रक्त ने ले लिया है। इस आंदोलन के
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पश्चिम बंगाल भुगत रहा है…पक्षपात का श्राप

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युवाओं का ही जुनून था कि देश स्वतंत्र हो सका, अहिंसा हो या हिंसा दोनों मार्ग बनाने वाले भले ही कोई और हों किन्तु इन पर चलने वाले इस देश के युवा ही थे। युवा जिन्होंने देश की स्वंत्रता के लिए ऐसे बलिदान दिए कि उन घटनाओं के स्मरण मात्र से खू़न गर्म हो उठता
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आपकी रक्षा की जा रही है…अविश्वसनीय किन्तु सत्य आत्मानुभूति

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आप में से हर एक के साथ कुछ न कुछ ऐसा अवश्य घटित हुआ होगा, जिसे आप समझ नही सके। आप की जान भी बची और कोई नुकसान भी न हुआ हो। एक शक्ति हर एक के साथ चलती है कार्य भी करती है किन्तु आप उस शक्ति से प्रभावित नही होते क्यूंकि आप उसे
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डर का अनुभव

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आत्मा होती है इस बात का आभास होने के लिए मुझे किसी आत्मा को देखने की प्रतीक्षा नही करनी पड़ी, आज सुबह की ही तो बात है जब मैं अपने ही शरीर के बाहर घूम रही थी। इतनी गहरी नींद में सोया मेरा शरीर कि उसे जगाना नामुमकिन हो रहा था, मैं स्वयं को ही
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