meet-him-he-is-pappu-300x225पप्पू कहते ही आप ग़लत क्यूं सोचने लगते हैं, पप्पू दरअसल परमपूजनीय का शॉर्टफार्म है, बीच में आधा प वार्तालाप की सहूलियत के लिए जोड़ा गया था। पपू कहने में होंठ चिपकते हैं न इसलिए? इस नाम में कोई बुराई नही, बुराई तो राहू में है। राहू लो आया दशा बिगड़ी समझो! पेट खराब, धन हानि, अपमान, बुद्धि भ्रष्ट, ग़लत निर्णय और बबुआ डूबे गर्त में। जिस पर भी बैठेगा तोड़ मरोड़ के ही उठेगा, बहरहाल बात उसी की हो रही है, जिसकी आप समझ रहे। इस प्रकार के कई जीव होते हैं, जिनके बारे में कहावत है कि, जहं-जहं पैर पड़े संतन के तहं-तहं बंटाधार! हैरत इस बात की है बचपन से ही ऐसा पालन पोषण हुआ है इस जीव का कि शर्म, शर्मिन्दगी और पछतावा इसे दूर से भी छूकर नही गया। कमाल का व्यक्तित्व, इसी कारण से इन्हें परमपूजनीय के शॉटफॉर्म नाम पप्पू से देश भर की जनता ने मिल कर सम्मानित किया है।
गठजोड़ में पप्पू का होना बेहद आवश्यक है, तभी भाजपा का सूर्य और प्रबल होगा। लगभग खाली हो चुकी कांग्रेस के पास अभी कुछ नाम और हैं जिनका बाहर जाना तय है। बस उनके जाते ही परमपूजनीय राहुल गांधी एक बड़ी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे। अब आप अपने दिमाग़ पर ज़ोर डाल रहे होंगे कि कौन सी ज़िम्मेदारी? भई देश के उत्थान की ज़िम्मेदारी, देश का प्रधानमंत्री बनकर जो निभानी थी?, इसके अलावा बबुआ और बुआ को अन्तिम घाट लगाए बिना इसे कहां चैन आने वाला। एक तरह से भाजपा के लिए खूफिया तौर पर कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे राहुल गांधी ने मोदी-योगी की राह काफी आसान कर दी है। अब बस शीघ्र संगठित होने वाले सपा-बसपा-कांग्रेस के गठबंधन में जुड़ कर इनके सर्वनाश की राह आसान कर दे पप्पू से इतनी सी उम्मीद है। पूरा प्रदेश आज बड़ी हसरत से राहुल गांधी की ओ देख रहा है और विजयी भव का आर्शिवाद देकर सर्वदलीय गठबंधन से जुड़ जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।

ऋतु कृष्णा

Ritu Krishna

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