कैराना : अपने ही देश में हिंदुओं का गमन

Aakash Srivastava

आश्चर्य होता है यह सब कुछ सुन कर , इतिहास अपने आप को दोहरा रहा है , यह सब कुछ भारत में हो रहा है जहां हिंदुओं की संख्या 80% है। 2016 के जून माह के आरम्भ से मीडिया के सभी पत्रकार कैराना के 346 परिवार के पलायन की खबर को जोरदार तरीके से दिखा रहे हैं। यह पलायन बीते कुछ ही वर्षो में हुआ है।

वयस्कों के लिए कोई नई खबर नहीं है क्योंकि उनके लिए हिंदुओं का इस तरह से पलायन एक आम खबर हो गयी है , इतिहास मे यह पहले भी हो चुका है जब 1990 के आरम्भ में कश्मीरी पंडितों का कश्मीर से सफाया कर दिया गया था। अब तक का यह सबसे अभागा समय होगा जब कश्मीरी घाटी से कश्मीरी पंडितों को ज़ोर जबरजस्ती से मुस्लिमों द्वारा डरा धमका कर भगा दिया गया। घाटी से एक लाख से लेकर लगभग साढ़े तीन लाख कश्मीरी पंडितों ने पलायन किया।

कश्मीर मे 1947 में हिंदुओं को संख्या लगभग 30-40% थी जब सीमाओं का बटवारा हुआ और भारत की सीमायें हिंदुकुश से सिकुड़ कर कश्मीर तक रह गईं थी। 1948 के मुस्लिम दंगे और 1950 के कश्मीर भूमि संशोधन के बाद 20% हिंदुओं ने घाटी छोड़ दी जिसके बाद मुस्लमान बहुसंख्यक हो गए और 1981 के अंत तक कश्मीरी पंडितों की संख्या मात्र 5% रह गयी थी। 1990 के समय काल में मुसलमानों और आतंकी तत्वों की धमकी के चलते पंडितों ने घाटी से पलायन तेज़ कर दिया। खास तौर से 19 जनवरी 1990 की वारदाते निंदनीय थीं। उस दिन मदरसों ने फरमान दिया था कि या तो कश्मीरी पंडित इस्लाम को क़ुबूल कर लें या फिर मृत्यु स्वीकार लें। जिन कश्मीरी पंडितों ने पहला फरमान माना उनसे अपनी औरतों को छोड़ने के लिए कहा। कश्मीरी मुसलमानों को आदेश मिले थे कि सभी हिंदुओं के घर की पहचान करो और एक एक कर के उनपर हमला करो ताकि कोई हिन्दू बच न जाए और हर से हिन्दू को निशाना बनाया जाये।

जो कश्मीर में 1990 में हुआ आज वही उत्तर प्रदेश के कैराना में हो रहा है। कश्मीर की दर्दनाक घटना को याद दिलाना आवश्यक था, वह इतने विधिवत रूप से पूर्ण की गई के कि आज घाटी में कही भी हिंदुओं का जमाव नहीं है, दूसरी और उससे भी दुखदायी बात यह है कि बीती घटना से अभी तक हिंदुओं ने नहीं सीखा और इस प्रकार की घटनाएं देश के कई हिस्सों में हो रही हैं। ऐसी निराशाजनक घटना राजधानी से मात्र 124 किलोमीटर दूर शामली जिले के कैराना कसबे में घटित हुई और यह कश्मीर में हुए गमन से बिलकुल भी भिन्न नहीं है। कम से कम 346 हिन्दू परिवारों ने गुंडागर्दी और धमकियों से परेशां हैकर कैराना से पलायन कर लिया है। यह आकड़ा शामली के सांसद हुकुम सिंह द्वारा मुहैया कराया गया है। जनसँख्या सूची पर ध्यान दे तो 2011 में कैराना में हिन्दू जनसँख्या 30% थी जबकि मुसलमानों की 68% थी पर अब नगर प्रबंधन की माने तो हिंदुओं की संख्या केवल 8% रह गयी है जबकि मुसलमानों की संख्या 92% हो गयी है।

इन दोनों घटनाओं को देखने के बाद ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता है। सरकार के साथ लोगों को भी इन घटनाओं से सीख लेनी चाहिए और ऐसी उग्र मानसिकता के लोगों से लड़ने के लिये तैयार रहना चाहिए।