end-of-naxalism-after-demonetization-a-lie-4-300x138सालों से नक्सलियों का पीछा कर रही, उनके पुर्नवास कार्यक्रम पर कार्य कर रही पुलिस को वास्तव में नक्सलियों के विषय में पूरी जानकारियां उपलब्ध हैं ही नही! सवाल उठता है कि क्या आत्मसमर्पण करने वाले आदिवासी सचमुच नक्सली ही होते हैं? यह सवाल पुलिस के आला अधिकारियों को नागवार गुजरता है। पुलिस का खुफिया तंत्र बड़े नक्सली नेताओं के बारे में पता लगाने में उतना कामयाब नहीं रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सचिव गणपति की जो तस्वीर अपने ’फ़ेसबुक’ पर जारी कर पांच करोड़ रुपये की घोषणा की थी वो लगभग तीस साल पुरानी कही जा रही है, यानी साठ साल की उम्र से भी ज़्यादा के गणपति अब कैसे दिखते होंगे, उसके बारे में पुलिस कुछ नही बता पाएगी।
पुलिस का दावा है कि ’पुनर्वास’ नीति की वजह से ही बस्तर संभाग में 1800 से ज़्यादा नक्सलियों ने पिछले एक साल के दौरान पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है, मगर जिन लोगों के आत्मसमर्पण का पुलिस दावा कर रही है उनमें से सिर्फ एक आध लोगों ने ही किसी आधुनिक हथियार के साथ समर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुलिस की पुनर्वास नीति के यह पोस्टर बस्तर संभाग हर इलाक़े में लगे हुए हैं जिसमें कहा गया है, “आत्मसमर्पित नक्सली के निवास हेतु सुरक्षित स्थान पर आवास भूमि एवं मकान बनाने हेतु आवश्यक राशि, आत्मसमर्पित नक्सली की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार शासकीय सेवा अथवा सुरक्षित स्थान पर कृषि योग्य भूमि अथवा स्वयं का व्यवसाय चलाने के लिए प्रशिक्षण एवं आवश्यक लागत राशि. आत्मसमर्पित नक्सली के पुनर्वास अंतर्गत उसे कैडर के अनुसार पुनर्वास राहत राशि का भुगतान, जो 50000 से 12 लाख रूपए तक हो सकता है।“
आत्मसमर्पण के इस ’पैकेज’ को प्रमुखता के साथ बताया गया है जिसमें विभिन्न हथियारों के साथ समर्पण करने वालों के लिए अलग अलग ’इनाम राशि’ को दर्शाया गया है। उदाहरणार्थ एलएमजी यानी ’लाइट मशीन गन’ के साथ समर्पण करने वाले नक्सलियों को 4.5 लाख रूपए, एके-47 राइफल के साथ 3 लाख रूपए, एसएलआर 1.5 लाख रूपए, .303 राइफल 75 हज़ार रूपए, और 12 ’बोर’ यानी भरमार देसी बंदूक़ के साथ 30 हज़ार रूपए देने का प्रावधान किया है।
यदि नक्सलवाद एक हथियारबंद क्रान्ति है तो जिन आंदोलनकारियों ने बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया और विभिन्न क्षेत्रों में आज भी कर रहे या करवाए जा रहे हैं क्या वे वास्तव में नक्सली ही हैं अथवा सरकारी योजना के तहत मिलने वाली धनराशी को आंशिक रूप से खपाए और बाकी का स्वयं खा जाने के लिए कोई योजनाबद्ध नीति…?

ऋतु कृष्णा over the counter viagra max

Ritu Krishna

Related Posts

Create Account



Log In Your Account