आपकी रक्षा की जा रही है…अविश्वसनीय किन्तु सत्य आत्मानुभूति

आप में से हर एक के साथ कुछ न कुछ ऐसा अवश्य घटित हुआ होगा, जिसे आप समझ नही सके। आप की जान भी बची और कोई नुकसान भी न हुआ हो। एक शक्ति हर एक के साथ चलती है कार्य भी करती है किन्तु आप उस शक्ति से प्रभावित नही होते क्यूंकि आप उसे महसूस ही नही कर पाते। वो ब्रह्माण्ड के हर हिस्से में व्याप्त अलौकिक ऊर्जा जिसे कुछ ईश्वर तो कुछ परम शक्ति तो कुछ पितर कह कर पुकारते हैं। मृत माता-पिता भी अक्सर परम रक्षा कवच के रूप में आप पर हावी रहते हैं जिसके कारण भयंकर बाधाएं भी सामान्य घटनाएं लगने लगती हैं। कुछ तो ऐसा है जो एक समान गति से काम करता है, अन्यमनस्क मन से गाड़ी चलाते वक़्त अक्सर ऐसा महसूस होता है कि शरीर तो है परन्तु गतिमान नही है अर्थात गाड़ी कोई और ही चला रहा है। आस-पास से तेज़ गुज़रती गाड़ियों के बीच से अपनी गाड़ी निकालते वक़्त क्या सारी वाहन चालक की कलाकारी होती है, सामने से तेज़ी से आते दूसरे वाहन या दो गाड़ियों से केवल कुछ इन्च की दूरी से तेज़ गति में निकलते वक़्त आप अचेतन मस्तिष्क में पहुंच जाते हैं। ये क्रिया अद्भुत रूप से कार्य करती है, इतनी तेज़ कि कोई कुछ समझे इससे पहले ही आप वापस आ चुके होते हैं। एक क्षण के लिए सुप्त हुए मस्तिष्क को आप भले ही महसूस न करते हों परन्तु जबतक समय पूरा न हुआ हो किसी भी बुरे से बुरे वाहन चालक की मृत्यु

डर का अनुभव

आत्मा होती है इस बात का आभास होने के लिए मुझे किसी आत्मा को देखने की प्रतीक्षा नही करनी पड़ी, आज सुबह की ही तो बात है जब मैं अपने ही शरीर के बाहर घूम रही थी। इतनी गहरी नींद में सोया मेरा शरीर कि उसे जगाना नामुमकिन हो रहा था, मैं स्वयं को ही नही जगा पा रही थी। अपने ही शरीर के इर्द-गिर्द चक्कर काटती घूम रही थी मैं इतना अद्भुत अनुभव जो पहले कभी नही हुआ। अगर जागने के बाद या सोने के पहले मेरे कमरे बिस्तर रोशनी खिड़की घर में मौजूद लोग आस पास का माहौल बदला हुआ दिखता तो मैं मान लेती कि मैंने सिर्फ एक सपना देखा कोई पारलौकिक शक्ति की अनुभूति नही थी ये, किन्तु ऐसा नही था। नींद में भी मैंने समय लोग और सारा का सारा माहौल वही देखा जो जागने के बाद देखा, पिता जी सोफे पर बैठे मोबाईल में कुछ ढूंढ रहे थे और घर का नौकर रसोईघर में दूध गर्म कर रहा था, चाय के लिए शायद मैंने उसे बुलाया पर उसने सुना नही, ज़ोर से आवाज़ दी और ज़ोर से, ताकत नही बटोर पाने के कारण आवाज उस तक नही पहुंच पा रही थी, घुटी हुई आवाज़ थी मेरी और मेरा गुस्सा बड़ा ही भयंकर था, मेरा चिल्लाना बढ़ता ही जा रहा था। मैंने स्वप्न नही देखा क्यूंकि उबलते दूध और किचन में रखा चीनी मिट्टी का वो बर्तन जो मेरे सोने के दौरान किचन में जहां छोड़ा गया था उसे मैंने वहीं देखा जब मैं जागकर

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